मुख्यमंत्री उत्तराखण्ड ने भ्रष्टाचार का आरोप साबित होने पर दो वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को किया निलंबित

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स्वच्छ एवं साफ प्रशासन देने में किसी प्रकार का समझौता नहीं, जीरो टाॅलरेंस के मार्ग से विचलित नहीं होगी सरकार- त्रिवेन्द्र सिंह रावत
मुख्यमंत्री उत्तराखण्ड ने भ्रष्टाचार का आरोप साबित होने पर दो वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को किया निलंबित

मंगलवार को भ्रष्टाचार पर करारा प्रहार करते हुए प्रदेश के दो वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को निलंबित करते हुए कड़ा संदेश देने का प्रयास किया है कि भ्रष्टाचारियों को किसी भी से मुक्त करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेगी। मार्च 2017 में प्रदेश में भाजपा सरकार के बनते ही सरकार को एनएच-74 भूमि मुआवजा वितरण में बड़े घोटाले की शिकायते प्राप्त हो रही थी। जिसका शीघ्र संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने एसआईटी जाॅच शुरू कराने के आदेश दिये और कुछ दिनों के अन्दर ही उसके परिणाम आने शुरू हो गये। इस प्रकरण में अभी तक 20 से अधिक अधिकारी जेल पहुंच चुके हैं, जिसमें कई पीसीएस अधिकारी भी शामिल हैं। उन्हें अभी तक कहीं से भी जमानत भी नहीं मिली है। लेकिन इतने पर भी उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री ने इस जाॅच को जारी रखने के निर्देश दिये। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस प्रकरण में जो भी लिप्त पाया जायेगा उन्हें बख्शा नहीं जायेगा चाहे उसमें वरिष्ठ आईएएस अधिकारी ही क्यों न हो।

इसी क्रम में जाँच आगे बढ़ने पर दो वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों का नाम भी घोटाले में आया। मुख्यमंत्री ने बड़े कद के अधिकारियों की प्रवाह न करते हुए एसआईटी को इन आईएएस अधिकारियों की जाॅच करने के लिए संस्तुती दी। आज मुख्यमंत्री के आदेश पर उत्तराखण्ड में पहली बार दो आईएएस अधिकारी पंकज पाण्डेय व चन्द्रेश यादव को निलंबित कर जीरो टाॅलरेंस की नीति पर त्रिवेन्द्र सरकार ने स्पष्ट संदेश दे दिया है।