बैंकों को फ्लैगशिप योजनाओं में विशेष रूप से कार्य करने की दी सलाह

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27 February  वित्त मंत्री श्री प्रकाश पंत ने बैंकों से फ्लैगशिप योजनाओं में विशेष रूप से कार्य करने को कहा है। खासतौर पर स्वरोजगार, फसल बीमा योजना, मुद्रा, सामाजिक सुरक्षा योजना पर फोकस करने की अपेक्षा की। कहा कि बैंकिंग सिस्टम को गांव तक पहुंचाना है। राज्य सरकार प्रदेश की 670 न्याय पंचायतों को ग्रोथ सेंटर के रूप में विकसित करना चाहती है। बैंक इसमें सरकार का सहयोग करें। वित्त मंत्री ने मंगलवार को स्थानीय होटल में 64वीं राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की बैठक की अध्यक्षता की।

मुख्य सचिव श्री उत्पल कुमार सिंह ने कहा कि इस एसएलबीसी में जो निर्देश दिए गए हैं, अगली बैठक में उनका शत्-प्रतिशत अनुपालन होना चाहिए। सभी योजनाओं के लिए लक्ष्य तय किये गए हैं। लक्ष्य को हासिल करने की कोशिश करनी पड़ेगी। उन्होंने वर्ष 2017-18 की वार्षिक ऋण योजना, ऋण जमा अनुपात, ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी, प्रधानमंत्री जन-धन योजना, सामाजिक बीमा योजना, आधार सीडिंग, 2022 तक किसानों की आय दोगुना करने की योजनाएं, फसल बीमा योजना सहित अन्य बैंक आधारित योजनाओं की प्रगति की जानकारी ली।

बैठक में बताया गया कि वार्षिक ऋण योजना हेतु वित्तीय वर्ष 2017-18 के लिए निर्धारित 18468.80 करोड़ रूपये के सापेक्ष तृतीय त्रैमास की समाप्ति तक बैंकों द्वारा 12219.41 करोड़ रूपये की उपलब्धि दर्ज की गयी है, जो भारतीय रिजर्व बैंक के तृतीय त्रैमास हेतु निर्धारित मानक 65 प्रतिशत के सापेक्ष 66 प्रतिशत है। वित्तीय वर्ष 2017-18 के दिसम्बर 2017 त्रैमास की समाप्ति पर राज्य का ऋण-जमा अनुपात 57 प्रतिशत रहा है, जो सितम्बर 2017 से 01 प्रतिशत अधिक है।

वित्तीय वर्ष 2017-18 में बैंकों द्वारा दिसम्बर 2017 की समाप्ति तक राज्य में कृषि क्षेत्र के अन्तर्गत कुल वितरित 5143.26 करोड़ रूपये में से 1659.65 करोड़ रूपये के ऋण कृषि क्षेत्र की अनुषंगी(एलाइड) गतिविधियों हेतु वितरित किए गए हैं। साथ ही एमएसएमई सेक्टर के अंतर्गत दिसम्बर 2017 त्रैमास की समाप्ति तक 2,93,528 इकाईयों को 15,546 करोड़ रूपये के ऋण वितरित किए गए है, जो सितम्बर 2017 त्रैमास की तुलना में 37 करोड़ रूपये अधिक हैं।

किसानों की आय को वर्ष 2022 तक दोगुना करने के लक्ष्य को दृष्टिगत रखते हुए बैंकों से अपेक्षा की गयी है कि वे कृषि क्षेत्र की अनुषंगी गतिविधियों यथा डेयरी, बकरी पालन, मुर्गी पालन, मधुमक्खी पालन, मछली पालन आदि के लिए अधिकाधिक वित्तपोषण करेंगे। बैंकों द्वारा भरोसा दिलाया गया कि कृषि एवं एमएसएमई सेक्टर को बढ़ावा देने हेतु इन सेक्टर के अंतर्गत अधिक से अधिक ऋण वितरित किए जाएंगे।

बैंकों को निर्देशित किया गया कि वे भारत सरकार के निर्देशों के अनुरूप सभी बैंक खातों में आधार सत्यापन के कार्य को दिनांक 31 मार्च 2018 तक पूर्ण करें। बैंकों द्वारा अवगत कराया कि वित्तीय साक्षरता शिविरों के माध्यम से जनसाधारण को खातों में आधार सीडिंग, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना, अटल पेंशन योजना, डिजिटल ट्रान्जेक्शन आदि के संबंध में निरंतर जागरूक एवं प्रोत्साहित किया जा रहा है। बैठक में यह भी अवगत कराया गया कि अप्रैल 2017 से दिसम्बर 2017 तक बैंकों द्वारा 6,072 वित्तीय साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया है।

बैठक में अवगत कराया गया कि कनेक्टिविटी रहित 716 एस.एस.ए. में से 716 के लिए वी-सैट के आर्डर बैंकों द्वारा प्रेषित कर दिए गए हैं, जिनमें से 451 एस.एस.ए. में वी-सैट स्थापित हो चुके है। नाबार्ड से जिन बैंकों ने वी-सैट लगाने हेतु पूर्व सहमति प्राप्त कर ली थी, उन्हें अवगत कराया गया कि वे वी-सैट स्थापित करने के कार्य को दिनांक 31 मार्च 2018 तक अनिवार्य रूप से पूरा करने के साथ प्रतिपूर्ति हेतु अपना प्रस्ताव भी उक्त तिथि के अंदर नाबार्ड को प्रेषित करना सुनिश्चित करें। बैंकों से यह अपेक्षा की गयी कि वे रेखीय विभागों से समन्वय स्थापित करते हुए सदैव की भांति राज्य के आर्थिक एवं सामाजिक विकास में अपनी अहम भूमिका निभाते रहेंगे।

बैठक में प्रमुख सचिव वित्त श्रीमती राधा रतूड़ी, प्रमुख सचिव ग्राम्य विकास एवं एमएसएमई श्रीमती मनीषा पंवार, भारतीय रिजर्व बैंक देहरादून के क्षेत्रीय निदेशक श्री सुब्रत दास एवं मुख्य महाप्रबंधक नाबार्ड देहरादून श्री डीएन मगर, महाप्रबंधक श्री अजीत सिंह ठाकुर सहित शासन के अधिकारी उपस्थित थे।